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Tuesday, July 21, 2020

अनुक्रणिका 3. मनुष्य देह का कार्य / जीवन की अनमोल विचार

3.मनुष्य देह का कार्य


                           


     डेविन ज्ञान की बात करने से पहले हमे अपने जीवन के बारे में जानना बेहद ही जरूरी है। सबसे पहले हमे मनुष्य किया है। मनुष्य जीवन के बारे जानकारी होनी चाहिए । मनुष्य जन्म से मुत्यु तक का सफ़र की जानकारी होनी चाहिए।  हमारा जीवन ही अनमोल तोफा है। अमूल्य रत्न भेट है। जो हम सबको एक जीवन दिया है। इसीलिए मनुष्य देह के बारे जानना ही हमारे लिए बहुत जरूरी होता है। देखें जाए तो, मनुष्य अपने जीवन काल में जीवन जीना ही सम्पूर्ण मानता है। जीवन में सिर्फ अपनी जरूरी चीजों  को ही सब कुछ मान लेता है। इसीलिए मनुष्य व्यवहार को सविस्तार से जानना पसंद करे।



      मनुष्य जन्म अवतार हम सबको मिला परमपिता परमात्मा की असीम कृपा है। आज जो हम सब परमात्मा की देन  है। जीवन मिला है। एक अनमोल देह है। मनुष्य जीवन का धयेह ,उद्देश्य और लक्ष्य को ज्ञान प्राप्ति करे। सबसे पहले यह जानना जरूरी है। मनुष्य किया है। मनुष्य का जन्म क्यू हुआ। मनुष्य का जीवन कार्य किया है।  मनुष्य जीवन इस संसार में किस लिए हुआ। इस संसार में मनुष्य जन्म उत्तम है। मनुष्य के पास प्रेम, दया ,करुणा, स्नेह, लगनी,सहनशीलता, विवेकता, नम्रता , ज्ञान , बुद्धि , चतुराई आदि मनुष्य के भीतर है। और मनुष्य जन्म अवतार के  अन्य जन्म में यह सब नहीं है। इसीलिए मनुष्य जन्म अवतार पूथ्वी पर उत्तम कहा गया है। मनुष्य इसीलिए उत्तम है कि, मनुष्य अपने साथ साथ दूसरों का भी पेट अथार्थ भूख मिटाता है। दूसरों पे दया करना । स्नेह करना , सब को साथ ले चलना , सब को एक सम्मान देखना आदि , यह सब मनुष्य के भीतर छुपा होता है।  



    बात, मनुष्य जन्म की है। मनुष्य जन्म से पहले ये जानना जरूरी है। मनुष्य देह केसे बनता है। मनुष्य देह केसे बना है।  मनुष्य देह पांच तंत्र से बना है।  

१.अग्नि २.वायु ३.जल ४.आकाश ५. पूथ्वी 

इन पांच तंत्र से शरीर का निर्माण हुआ है। मनुष्य देह की रचना अमूल्य भेट है। 

अग्नि : देह में ऊर्झा/गर्मी देती है।

वायु: देह में प्राणवायु का कार्य करता है।

जल: देह में प्रवाह करती है।

आकाश: देह के बीच स्थान में प्रकट होता है।

पूथ्वी : देह मिट्टी से बनाना है।

 पांच तंत्र में से सब का कार्य नियमित होता है। यदि, इन पांच तंत्र में से एक तंत्र का कार्य रुक जाता है। देह में कष्ट होना चालू होता है। देह हमारा साथ नहीं देता।  देह नियमित कार्य करता है। क्यू कि, पांच तंत्र सही दिशा में कार्य करता है। देह में इन पांच तंत्र में से कुछ तंत्र कार्य करना बंद करता है। देह में इन पांच तंत्र अग्नि , वायु , जल , आकाश, और पूथ्वी  का कार्य होता ही रहता है। मनुष्य दुनिया से पतन तभी होता है । जब मनुष्य के भीतर इन पांच तंत्र में से किसी तंत्र का कार्य रुक जाता है। देह साथ नहीं देता है। देह कमजोर पड़ता है। अनुचित कार्य होते है। देह आत्मा से साथ छोड़ देता है। और मनुष्य देह से आत्मा को जाना ही होता है।  

 

 आप भ्रमित हुए होंगे, आत्मा किया है। देह और देह  का किया संबंध है। देह में से आत्मा का रहस्य किया है। आत्मा पांच तंत्र में से छ:वा  तंत्र है, आत्मा ? हम आप को आत्मा के बारे में कुछ समय के बाद बताएंगे । पहले हम मनुष्य देह और मनुष्य के बारे में जानना बेहद जरूरी है। 


   मनुष्य का देह की रचना होती है। और मनुष्य जन्म पांच तंत्र का आधार है। देह में आत्मा का वाश होता है। तब मनुष्य देह जीवित होता है।  हम सब आज जीवित है। 

हमारा शरीर कार्य करता रहता है। जब तक हम देह के भीतर पांच तंत्र को सही दिशा में कार्य करना चालू रखेगे।


  यदि, कोई मनुष्य अपना जीवन त्याग देता है। तो , मनुष्य की मूत्यू केसे होती है।  आप जानते है।, जो भी मनुष्य अपने देह को त्यागता है। वह मनुष्य सत्य , धर्म और पर्मापरा  नीति - नियम को उल्लघन करता है। देह में पांच तत्र में से एक एक तंत्र कार्य करना बंद करता है। और ऐसे में छः वा  तंत्र आत्मा देह को छोड़ देता है। ऐसे में मनुष्य देह की मूत्यु हो जाती है। 


  देह से ही सब कार्य किया जा सकता है। देह का कार्य उत्तम है। मनुष्य कर्मयोगी बनता है। जीवन सफल बन जाता है। मनुष्य देह पैरो से चलना- फिरना, हाथो से कार्य करना और स्पर्श करना , कानों से सुनने की शक्ति, आंखों से देखना , जिभा से बोलना , विचार, इशाए, अशाए, भावनाए,  चेतना, केंद्र - इन्द्र , ज्ञान, बुद्धि, प्रेम , दया , करुणा , स्नेह, सहनशितला, विवकता, नम्रता , मोहमाया , लालच,क्रोध, क्रोना,ईर्षा, वेर, नफरत, सुख:दुख, जीवन हतास, कठिनाई, सब मनुष्य देह से आती है। देह से सब कुछ कार्य होता है। लेकिन देह से ही सीमित रहता है।  




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